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|| आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः || Let nobel thoughts come to us from everywhere, from all the world || 1.89.1 Rigveda ||
Section : Literature
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हिन्दू परिवार, हिन्दू संस्कार, हिन्दू संस्क्रति के विरूद्ध बन रहे कानून, परिवार संस्था पर आक्रमण है।
 
हिन्दू परिवार, हिन्दू संस्कार, हिन्दू संस्क्रति के विरूद्ध बन रहे कानून, परिवार संस्था पर आक्रमण है।

By सम्वाद भार्ती पोस्ट




*पश्चिम प्रकार की शिक्षा और लम्बी गुलामी के काल के कारण हिन्दू परिवार का पश्चिमिकरन

  हो रहा है।

 *हिन्दू परिवार में एक समय पिता के सभी पुत्र एक साथ रहते थे। सारी सम्पदा संयुक्त ही होती थी। सभी मिलकर

 अपने परिवार के लिए परिश्रम करते थे और सम्रद्धि निर्माण करते थे।

 *घर का बुजुर्ग सबका श्रद्धेय व सम्माननीय होता था। परिश्रम का फ़ल उसी के चरणों मे रखते थे वही परिवार के 

 हिताहित में उसका विनियोग करते थे।

 *घर मे सभी कार्य-विचार-विमर्श से होते थे। घरों में बुजुर्ग के प्रति आदर और सम्मान थी।

 *कोई बहन-बहू यदि विधवा भी हो गई तो उसका जीवन परिवार में सरलतापूर्वक कट जाता था।

 *सभी मे प्रेम -आदर का भाव था। विवाह घर में किसी का हो वह सभी के परिश्रम से सानन्द सम्पन्न होता था।

 *कुटुम्ब में दूर-दूर तक के सम्बन्धों का पालन किया जाता था। खुशी या गम में एक  दूसरे का सहारा बनते थे। 

 दूर-दूर तक जाकर रिस्तेदारी को प्रगाढ़ करते थे।

 *बिमारी में परिवार ही नही तो सारा कुटम्ब संवेदित होता था।

 *घरों में माताएँ पालने में झूलने वाले बच्चों को लोरी गाकर श्रेष्ठ बातों का संस्कार देती थी।

 *गर्भधारण के समय से ही संस्कारी आयोजन आरम्भ होते थे।

 *बुजुर्ग माताएँ अष्टप्रहर के भजन गाती थी इस कारण से बालकों के ह्रदय में निष्ठा-भक्ति का उदय होता था।

 *घरों में तुलसी, गायमाता आमतौर पर रहती थी।

 *वर्ष भर त्योहारो की धूम-चलती थी जिससे जिससे नवपीढ़ी में वीरता, त्याग कर्मण्यता, सत्य, धर्मनिष्ठा,

 निर्माण होती थी।

 *कर्मण्य पुरूषों व त्यागियों के सम्मान का पाठ एक बालक घर से ही सीखता था।

 *वीर-वीरागंनाओं की गाथाएँ बड़े धूमधाम से गायी व सुनी जाती थी।

 *घरों में सभी का जन्मदिन धुमधाम से मनाते थे। मिठाई बनती थी और सभी साथ बैठकर खाते थे।

 कथा-वार्ता भी समय-समय पर होती रहती थी।

 *अतिथि सेवा प्रेमपूर्वक होती थी।

 *ग्रामीणों के अपने खेत-खलियान थे। इसके साथ ही प्रत्येक घरों में काफ़ी पशुधन था।

 *पूजन व पूजा के अनेक त्योहार थे जिनमें श्रद्धापूर्वक परिवार भाग लेता था जिसे घर के सभी बालक देखते थे।

 इससे बालक मे उस त्योहार की महिमा का ज्ञान होता था।

 *परिवार संस्कारी, व प्रेम में पगे थे। वहाँ हर क्षण संस्कार की सरिता बहती रहती थी। इसके कारण उस काल 

 में संस्कारो का प्रवाह चलता था। जिससे सभी घर के व्यक्ति संस्कारवान बनते थे।

*विदेशी शिक्षा व विदेशी परिवेश को धारण करने के कारण आज भारत मे हिन्दू संकुचित व सांप्रदायिक कहा

 जा रहा है।

 *विदेशियों की प्रतिक्रति बनाने का उपक्रम सत्ता और सत्ता द्धारा चालित संस्थानो द्धारा चालू है।

 *भारतीय संस्क्रति का अनुपालन आज प्रतिगामी बना दिया गया है।

 *हिन्दू अपनी परम्परा का पालन करना चाहता है परन्तु सत्ता उसे कानून की मोटी दीवार मे बंद्ध करने को 

 तत्पर है।

 *हिन्दूओं को कानून के घेरे मे लेकर उसे कुंठा ग्रस्त बनाया गया है।

 *बहुत पहले शारदा एक्ट बनाया गया। बाल विवाह नही हो। हिन्दु समाज ने काफ़ी-कुछ मात्रा में इसे 

 स्वीकार किया है।

 *हिन्दू भारत धर्मप्रधान देश है परन्तु हिन्दुओं को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से संविधान में जोड़ा गया कि 

 भारत एक लोकतांत्रिक धर्मनिर्पेक्ष समाजवादी देश है। सेक्यूलर का अर्थ धर्मनिरपेक्ष करके नेताओं ने सर्वत्र 

 इसका जोरशोर से प्रचार किया।

 *भारत की परम्परा में सभी जातियो में सगोत्रीय विवाह वर्जित है परन्तु आज ऐसा वायुमण्डल बनाया जा रहा

 है जैसे यह परम्परा गलत है। सत्ता व समाचार पत्र भी इसके विरूद्ध बकवास करते है और न्यायालय का रूख

 भी स्पष्ट नही है।

 *भारतीय परिवार में पिता की सम्पदा पुत्रो में ही वितरित होती रही है परन्तु कानून बना है कि पुत्रों के समान

 पुत्री भी सम्पदा की हकदार है यदि बहन ने कानून के अनुसार अपना हिस्सा लिया तो भाई-बहन के सम्बन्धों 

 खटास निर्माण होगी और बहन-भाई के सम्बन्ध टूट जायेंगे।

 *परम्परानुसार भाई अपनी बहन को जीवन पर देता रहता है यहाँ तक कि बहन के बच्चों के वि्वाह मे वह बड़ी

 भारी राशि द्धारा भात भरता रहा है। यदि इस कानून का प्रयोग कर किसी बहन ने सम्पति में अपने लिये

 बटवारा कराया तो आगे सम्बन्ध समाप्त प्राय होंगे, यह हमारी सांस्क्रतिक परम्परा पर आघात है।

 *हिन्दुओं पर हिन्दू कोट बिल लादा गया और उसे कील करने का प्रयास किया है।

 *अब तो विदेशी विचारों के गुलामों ने उनकी नकल करते हुए भारत की श्रेष्ठ सांस्क्रतिक परम्परा को विक्रत करने

 हेतु समलिंगी विवाह का समर्थन करना आरम्भ किया है। न्यायालय व भारत की सत्ता दोनो ही सांस्क्रतिक श्रेष्ठता

 के प्रति उदासीन लगते हैं।

 *हिन्दुसमाज में एक पत्नि की परम्परा है परन्तु किसी विशेष कारणों से दूसरे विवाह की आवश्यकता अनुभव 

 होती है तो कानूनी द्रष्टि से यह अस्वीकार है। यदि किसी सरकारी कर्मचारी ने यह किया तो वह अपनी नौकरी 

 से निष्कासित होगा।

 *हिन्दुसमाज ने अपनी श्रद्धा की अभिव्यक्ति करते हुए देश में हजारों मंदिरो का निर्माण किया है। इनमें से कुछ 

 मंदिर विशाल हैं जहाँ भक्तों द्धारा दर्शन-पूजन भारी मात्रा में होता है। दर्शनार्थियों द्धारा भगवान के श्रीचरणों में

 भारी मात्रा में धनराशि भेंट की जाती है, परन्तु इस हिन्दू विरोधी सरकारों ने ऐसे सभी मंदिरों का अधिग्रहण

 कर लिया है। इन मंदिरों के ट्रस्ट व संचालन में हिन्दू विरोधी विधर्मियों को भी रखा जाता है। सरकार व विधर्मी 

 मिलकर हिन्दूओं द्धारा श्रद्धा पूर्वक भेंट की गई सम्पदा का हिन्दूविरो्धी कार्यो में विनियोग कर रही है कहा जाता 

 है हजयात्रा मे, चर्च निर्माण में, मस्जिद मदरसे हेतु भी इस सम्पदा का वितरण होता है। हिन्दूकार्यो में इसका 

 प्रयोग कम करते हुए हिन्दुओं की श्रद्धा व संस्क्रति को धक्का पहुँचाने का कार्य हो रहा है।

 *हिन्दुओं की श्रद्धास्पद गोमाता की हत्या भारत के कई प्रान्तो मे चालू है। जिन प्रान्तों में कुछ कानून ऐसे बने हुए 

 है कि उसमे से अनेक रास्ते निकलते है। भारत सरकार इसे राज्यों का विषय कहकर केन्द्रीय कानून बनाने को 

 तैयार नही है। इसके विपरीत केन्द्रिय सरकार यांत्रिक कतलखाने खोल करके गोधन को मारकर गोमांस द्धारा धन 

 कमाते हुए हिन्दुओं की महान संस्क्रति को लांच्छित कर रही है।

 *भारत में कभी सतीप्रथा नही। सती का अर्थ श्रेष्ठ पतीव्रता से था। पर आज सती शब्द गैरकानूनी हो गया है। 

 इसके कारण सतीत्व की श्रेष्ठता ओझल होकर विक्रति की दिशा चल पड़ी है।

 *सरकार ने सम्पूर्ण हिन्दूसमाज को बांटने हेतु पिछड़ा, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, अतिपिछड़ा

 आदि नाम देकर बांटते हुए नई जातियों को जन्म दिया है। पहले की जातियो का उत्पन्न जहर पूरी तरह समाप्त

 नही हुआ है पर अब उत्थान के नाम पर निहित स्वार्थो का भूत समाप्त खड़ा करके हिन्दुसमाज में रोग पैदाकर दुरियां

 निर्माण का कानूनी विष फ़ैलाया गया है इससे सामाजिक व सांस्क्रतिक एकता पर बड़ा भारी आघात हो रहा है।

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